लेखनी कहानी -14-Dec-2022
लाला हरद्याल की जीवनयात्रा
प्रस्तावना
लाला हरद्याल एक भारतीय राष्ट्रवादी क्रांतीकारी थे। वे एक बहुश्रूत थे। जिन्होंने अपना करियर भारतीय नागरिक सेवा में बना लिया था। उनके साधे जीवन और उच्च विचारवाली विचारधारा का कनाडा और USA मे रहनेवाले भारतीय लोगो पर काफी प्रभाव पडा। पहले विश्व युद्ध मे ब्रिटिश साम्राज्य वाद के खिलाफ उन्होने आवाज उठाई थी।
प्रारंभिक जीवन
उनका जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली के पंजाबी परिवार मे हुआ। हरद्याल ,भोली रानी और गौरी दयाल माथुर की सात संतानो मे से 6 संतान थे।उनके पिता जिला न्यायालय के पाठक थे।
जीवन के शुरुआती दिनो में ही उन पर आर्यसमाज का काफी प्रभाव पडा। साथ ही वे भिकाजी कामा, श्याम कृष्ण वर्मा और वि. ना .सावरकर से भी जुडे हुए थे।
शिक्षा
Cambridge Mission school मे पढकर उन्होने सेंट स्टिफन काँलेज, दिल्ली से संस्कृत मे bachelor Degree हासील की और साथ ही पंजाब university से उन्होने संस्कृत में Master की Degree भी हासील की थी। 1905 मे उच्च शिक्षा के लिये oxford university से उन्होने 2 शिष्यवृती मिली।
इस के बाद आनेवाले सालो मे वे oxford से मिलने वाली शिष्यवृती को त्याग कर 1908 मे भारत वापस आ गये और तपस्य मयी जीवन जीने लगे,लेकिन भारत मे भी उन्होने प्रसिद्ध अखबारो के लिये कठोर लेख लिखना शुरु किया, जब british सरकार ने उन के कठोर लेखो को देखते हुए उनपर प्रतिबंध लगाया तो लाला लजपत राय ने उन्हे भारत छोड कर विदेश चले जाने की सलाह दी थी।
लाला हरद्याल के गुण
लाला हरदयाल जो न केवल महान व्यक्तीत्व के स्वामी थे,बल्कि गंभीर चिंतक ,विचारक,लेखक और महान देशभक्त थे।
मृत्यू
हरद्यालजी ने अपने उद्देश की पूर्ती के लिये कहीं से सह योग न मिलने पर शांतिवाद का प्रचार करने लगे। इस विषय पर व्याख्यान देने के लिये वे फिलाडेल्फिया गये थे। 1939 ई.में वे भारत आने के लिये उत्सुक थे। देश की आजादी का यह फकीर 4 मार्च 1939 ई.को कुर्सी पर बैठा-बैठा विदेश मे ही सदा के लिये पंचतत्व मे विलीन हो गया।
Sachin dev
15-Dec-2022 05:33 PM
Amazing
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